Monday, May 22, 2023

हिन्दू हृदय सम्राट, वीरों के वीर महाराणा प्रताप की जयंती की समस्त देशवासियों को शुभकामनाएं l

हिन्दू हृदय सम्राट, वीरों के वीर महाराणा प्रताप की जयंती की समस्त देशवासियों को  शुभकामनाएं

आज यानी 22 मई 2023, सोमवार के दिन मेवाड़ सपूत महाराणा प्रताप की जयंती मनाई जा रही है। वीर योद्धा महाराणा प्रताप की जयंती को लेकर कई मत हैं। अंग्रेजी कैलेंडर की मानें तो महाराणा प्रताप जयंती 09 मई को मनाई जाती है, वहीं दूसरा दिन हिन्दू पंचांग में बताई गई तिथि के अनुसार निर्धारित किया जाता है।भारत में अंग्रेजी कैलेंडर और हिन्दू पंचांग इन दोनों को महत्व दिया जाता है। अधिकांश भारतीय भूभाग में हिन्दू पंचांग के आधार पर ही व्रत एवं त्योहार निर्धारित किए जाते हैं। हम यदि महाराणा प्रताप के जन्म की बात करें तो अंग्रेंजी कैलेंडर के अनुसार, उनका जन्म 09 मई 1540 में हुआ था। वहीं ज्योतिष पंचांग की मानें तो उनका जन्म ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि के दिन पुष्य नक्षत्र में हुआ था, जो विक्रम संवत 2080 में आज के दिन है। यही कारण है कि कुछ ही दिनों के अंतराल पर वीर महाराणा प्रताप की जयंती दो बार मनाई जाती है। प्रताप के पिता का नाम राणा उदय सिंह और माता का नाम जयवंता बाई था। प्रताप राजपूत परिवार से थे । प्रताप की धर्मपत्नी का  नाम महारानी अजब्धे पंवार  था । महाराणा के बारें एक बात प्रसिद्ध है कि  उन्होंने जीवन में कभी हार नहीं मानी, परिस्तिथियाँ चाहे कैसी भी हो अगर हम पूरी हिस्ट्री उठाकर देखें तो ऐसे लोग कम ही हुए हैं, जिनमें किसी भी परिस्थिति में हार न मानने का जज्बा रहा हो। महाराणा प्रताप भारतीय इतिहास के ऐसे कुछ लोगों में से एक रहे हैं। प्रताप के घोड़े का नाम चेतक था

                                                                             (सोर्स : इंटरनेट, उदयपुर म्यूसियम )

कहा जाता है कि चेतक इतना समझदार था कि राणा की पुतलियां घूमी नहीं कि चेतक को समझ में आ जाता था किस ओर मुड़ना है। उनके मनपसंद हाथी का नाम 'रामप्रसाद' था, जिसने हल्दीघाटी की लड़ाई में मुगल सेना के 13 हाथियों को मार गिराया था।

                                                                                    (सोर्स : इंटरनेट, उदयपुर म्यूसियम )

महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य 

आज के इस आर्टिकल में हम महाराणा प्रताप से जुड़ी उन रोचक बातों को जानने की कोशिश करेंगे जिन्हें अपनाकर हम अपने जीवन को सफलता की ओर ले जा सकते हैं :-

  • अपने लोगों से जुड़कर ही सफलता प्राप्त की जा सकती है 

महाराणा का जन्म एक राज परिवार में हुआ था और एक राजकुमार होते हुए भी 'प्रताप' अपना अधिकांश समय 'मेवाड़' में घूमते हुए बिताते थे। वह वहाँ रहने वाले 'भील' लोगों बहुत लोकप्रिय थे। वह भीलों को अपने घर का सदस्य मानते थे। महाराणा उनके सुख दुःख में हमेशा शामिल होते थे,  उनके साथ घुल मिल जाते थे,उनकी हर तकलीफ में प्रताप सदैव उनके साथ खड़े रहते थे और यही कारण है कि महाराणा प्रताप की सेना में हजारों 'भील' सैनिक थे जो राणा की आज्ञा पर जान कुर्बान करने को तैयार थे। अपने मातृभूमि के लोगों से दिल से जुड़े होने की वजह से ही प्रताप ने एक ऐसी  छापामार युद्ध प्रणाली डेवेलप कर ली थी जिसकी कोई काट अकबर के पास नहीं थी और उसी वजह से प्रताप अंत तक अजेय बने रहे l 'हल्दीघाटी' के युद्ध के बाद, जब प्रताप मुग़ल सेना पर  "छापामार" कार्यवाहियाँ कर रहे थे, तब भीलों ने प्रताप की बहुत मदद की क्योंकि भील लोग हजारों सालों से इन इलाकों में रहते आये थे और उन्हें इन क्षेत्रों की भौगोलिक जानकारी भी सबसे ज्यादा थी। भील महाराणा प्रताप की हमला कर छुपने में मदद करते। वस्तुतः देखा जाए तो महाराणा प्रताप इसी कारण मुग़लों से अपनी लड़ाई को जीवन पर्यन्त खींच पाएं। प्रताप की यह बात हमें यह सिखाती की आप कुछ भी कर रहें हो जैसे कि पढ़ाई या कोई बिज़नेस सभी में जमीन से जुड़कर , मूल स्तर पर कार्य करना चाहिए ।

  •  आपका एटीट्यूड ही सब कुछ हैऔर बिना  एटीट्यूड आपका जीवन व्यर्थ है 

प्रताप को लेकर कई तरह की अफवाहों का बाजार हमेशा गर्म रहता है,उनके बारें में कई तरह की कहानियाँ फेमस हैं कोई कहता है कि उनके भाले का वजन 80 किग्रा, तलवार का वजन 5 किग्रा और कवच इत्यादि को  मिलाकर कुल वज़न करीब 300 किग्रा था, यह सारी बातें गलत और भ्रामक हैं। उदयपुर म्यूजियम के बाहर उनके अस्त्र-शस्त्र का कुल वजन 35 किग्रा बताया गया है। सामान्य तौर पर कद में मेवाड़ के लोग छोटे होते हैं, जबकि पश्चिमी राजस्थान के लोग 6 फीट से 6 फीट 6 इंच के बीच होते हैं। यहाँ इम्पॉर्टेंट फैक्ट और बात यह कि बाहरी सुंदरता या रूप आपको महान लोगों की केटेगरी में नहीं खड़ा कर सकता जैसे कि प्रताप की लम्बाई और उनके अस्त्र-शस्त्रों के वजन को लेकर जो अफ़वाहें हैं उन बातों की वजह से प्रताप महान नहीं बनें, वह महान हैं अपने मातृभूमि की रक्षा के जज़्बे की वजह से और उसी जज़्बे की वजह से प्रताप लाइफटाइम अजेय बनें रहे l 

  • लाइफ में सही या गलत डिसिशन की इम्पोर्टेंस 

हमारी लाइफ में डिसिशन की बहुत इम्पॉर्टैंस होती है वो कहते हैं कि न "म्हों ने खता की, सजा सदियों ने पाईl" मतलब जब हम रणनीति बनाने में गलतियाँ करते हैं तब वह गलतियाँ बहुत भारी पड़ती हैं। जिस मुग़ल सेना से लड़ने में ना केवल महाराणा प्रताप ने बल्कि उनके पूर्वर्जों राणा उदयसिंह, राणा संग्रामसिंह (राणा सांगा के नाम से प्रसिद्द) तथा उनके वंशजों राणा अमरसिंह इत्यादि ने अपने जीवन खपा दिए। उस मुग़ल सेना के संस्थापक 'बाबर' को भारत में 'राणा सांगा' सहित अन्य देशी राजाओं ने ही 'इब्राहिम लोदी' पर हमला करने के लिए न्यौता दिया था। लेकिन यह रणनीतिक निर्णय गलत साबित हुआ। उस समय की सोच के अनुसार भारतीय राजाओं को लगा की 'बाबर', लूट-पाट कर वापस लौट जाएगा। लेकिन 'बाबर', ना केवल हिन्दुस्तान में रूक गया बल्कि वह मेवाड़ के लिए पुराने शत्रु 'इब्राहिम लोदी' से ज्यादा खतरनाक साबित हुआ। यहाँ इन बातों से हमें यह सबक मिलता है  कि स्ट्रेटेजिक डिसीज़न बहुत इम्पॉर्टेंट होते हैं। कुछ भी डिसिशन लेते वक़्त भविष्य में उस निर्णय से  उपजने वाले परिणामों पर आराम से विचार करना चाहिए।

इस आर्टिकल के अंत में अपने रीडर्स से यही कहना चाहता हूँ कि हम सभी को अगर अपने जीवन को सफल बनाना है तो प्रताप के आदर्शों पर चलना होगा तभी हम अपने जीवन में आगे बढ़ पायेंगें और देश के प्रति अपने कर्त्तव्यों को पूरा कर पायेंगें l अंत में कवि वाहिद अली वाहिद की यह पंक्तियाँ मुझे याद आती हैं : 

दोनों ओर लिखा हो भारत, सिक्का वही उछाला जाए, तू भी है राणा का वंशज, फेंक जहां तक भाला जाए। 



 

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